- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
देवउठनी ग्यारस आज: CM डॉ. मोहन यादव तुलसी-शालिग्राम के विवाह कार्यक्रम में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
हिंदू धर्म में हर तिथि का एक विशेष महत्व होता है, जो किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होती है। इसी तरह, हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ये तिथि विष्णु जी और मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस साल, पंचांग के अनुसार, 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन देवउठनी एकादशी का त्योहार मनाया जाता है। देवउठनी ग्यारस के दिन विशेष मंत्रों का जाप कर भगवान विष्णु और माता तुलसी की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
इस दिन से सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। लोग इस खास दिन पर व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इसके साथ ही, विशेष चीजों का दान भी किया जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होता है और शुभ फल प्राप्त करता है।
वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को देवउठनी ग्यारस की शुभकामनाएँ दी हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के निवास में तुलसी-शालिग्राम के विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने श्री हरि और मां तुलसी से प्रार्थना की कि प्रदेशवासियों का जीवन सुख, समृद्धि और खुशहाली से भरा रहे। डॉ. यादव ने माता तुलसी की पूजा करते हुए मंत्रों का जाप किया और धूप, सिंदूर, चंदन, और फूल अर्पित कर नैवैद्य का भोग चढ़ाया।